भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलायों का भूमिका
भारत की स्वतंत्रता में महिलायों का योगदान - वीरांगनाओं की कहानी ( Contribution of women in India's independence - Story of brave women )
स्वतंत्रता संग्राम की महिला सेनानी
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जहां एक ओर वीर पुरुषो ने अपनी बहादुरी दिखाई, वही दूसरी और महिलायों ने भी आज़ादी के लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस स्वतंत्रता संग्राम के महायज्ञ में महिलायों की भूमिका अद्वितीय थी। इस स्वतंत्रता संग्राम के दोरान महिलियो ने अपनी अटूट इच्छाशक्ति, धैर्य, साहस, और देशभक्ति का परिचय दिया। आज़ादी की लड़ाई में रानी लक्ष्मीबाई से लेकर मातंगिनी हाजरा, सरोजनी नायडू, अरुण आसिफ अली, जेसे अनेक महिलायों ने अपने प्राणों ककी आहुति दी। इस लेख में हम जानेगे की स्वतंत्रता संग्राम में महिलायों का योगदान और उनके अद्भुद साहस का परिचय।
भारत की बेटियों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अतुलनीय योगदान दिया और भारत के आज़ादी की नीव रखी। भारत की आज़ादी में महिलायों का महत्वपूर्ण योगदान है। महिला स्वतंत्रता सेनानी के नाम :-
भारत की Top 10 महिला स्वंतत्रता सेनानी
- रानी वेलुनाचियर
- रानी लक्ष्मीबाई
- झलकारी बाई
- रानी गाइदिनल्यू
- बेगम हजरत महल
- कस्तूरबा गाँधी
- सरोजिनी नायडू
- भिकाजी कामा
- अरुण आसिफ अली
- मातंगिनी हाजरा
भारत की स्वतंत्रता में वीर स्त्रीयों का योगदान। महिला स्वतंत्रता सेनानी: भारत की आज़ादी की नायिकाए। भारत की महिला क्रन्तिकारी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महिलाए। स्वतंत्रता संग्राम की प्रसिद्ध महिलाए।
1. रानी वेलुनाचियार ( 1730 - 1796 )
- नाम- रानी वेलुनाचियार
- जन्म - 3 जनवरी 1730
- जन्म स्थान - शिवगंगई राज्य ( वर्तमान तमिलनाडु )
- माता - रानी संकादिमुथू सेतुपति
- पिता - राजा चेल्ल्मुथू सेतुपति
- पति - मुथुवदुगनाथ पेरिया उदेयनार
- मृत्यु- 25 दिसम्बर 1796
- योगदान- अंग्रेजो के खिलाफ भारत का पहला आन्दोलन या युद्ध
- प्रसिद्धी - भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी
रानी वेलुनाचियार को तमिल, तेलगु, उर्दू, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषाओ का ज्ञान था। उन्होंने बचपन में ही घुड़सवारी, तलवारबाजी, युद्धकला, और राजनीति की शिक्षा प्राप्त की थी। अंग्रेजो ने जब 1772 में रानी के पति की हत्या कर दी और उनके राज्य पर कब्जा कर लिया। तब रानी वेलुनाचियार ने हैदर अली ( टीपू सुलतान के पिता ) के मदद से उन्होंने अपनी सेना खड़ी की और अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। 1780 में उन्होंने अपने शिवगंगई राज्य को वापस हासिल किया और अंग्रेजो को खदेड़ भगाय। रानी वेलुनाचियार अंग्रेजो को मात देने वाली भारत की पहली महिला शासक ( स्वतंत्रता सेनानी ) थी।
2. रानी लक्ष्मीबाई (1828 - 1858 )
- पूरा नाम - मणिकर्णिका तांबे
- प्रसिद्ध नाम - रानी लक्ष्मीबाई
- जन्म - 19 नवम्बर 1828
- जन्म स्थान - वाराणसी, उत्तरप्रदेश
- माता - भागीरथी सापरे
- पिता - मोरोपंत ताम्बे
- पति - गंगाधर राव
- पुत्र - दामोदर राव ( गोद लिया हुआ पुत्र )
- मृत्यु - 17 जून 1857
- योगदान - अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध और 1857 की क्रांति का नेतृत्व।
रानी लक्ष्मीबाई जिन्हें झाँसी की रानी भी कहा जाता है, जिनके पति गंगाधर राव के मृत्यु के बाद अंग्रेजो ने झाँसी पर कब्जा करने की कोशिश करने लगे क्योकि रानी लक्ष्मीबाई का कोई अपना पुत्र नहीं था इसलिए अंग्रेजो का कहना था की झाँसी अब अंग्रेजो के आधीन रहेगा जो की रानी लक्ष्मीबाई को स्वीकार नहीं था। जिसके कारण रानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजो के बिच कई युद्ध हुए। आगे चलकर रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया और अंग्रेजो को मुह तोड़ जवाब दिया।
3. झलकारी बाई (1830 - 1890 )
- झलकारी बाई, रानी लक्ष्मीबाई की प्रमुख योद्धा थी।
- नाम- झलकारी बाई
- लोकप्रिय उपाधि - झाँसी की शेरनी
- जन्म - 22 नवम्बर 1830
- जन्म स्थान - भोजला गाँव, झाँसी, उतरप्रदेश ( अब ललितपुर जिला )
- माता - जमुनाबाई
- पिता - सदोबा कोली
- पति - पूरण कोली
- मृत्यु - 4 अप्रेल 1890
- योगदान- उन्हें भारत की पहली महिला योद्धा के नाम से जाना जाता है।
- रानी लक्ष्मीबाई की परम मित्र और महान योद्धा।
एक महान वीरांगना जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के लिए अपना सर्वोश निछावर कर दिया। झलकारी बाई का बचपन कठिनाई भरा था। उनके माँ का देहान्त बचपन में ही हो गया था। उन्होंने अपने पिता से घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्धकला सिखी। झलकारी बाई की शादी पूरण कोली से हुई, जो ब्रिटिश सेना में सेनिक थे, फिर बाद में वे झाँसी की सेना में शामिल हो गए और इसके बाद झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई के संपर्क में आई और दोनों मिलकर अंग्रेजो को कई बार हराया।
4. रानी गाइदिनल्यू ( 1915 - 1993 )
- नाम- गाइदिनल्यू पामेई
- प्रसिद्ध नाम - रानी गाइदिनल्यू
- जन्म- 26 जनवरी 1915
- जन्म स्थान - नुंगका ओंग गाँव, मणिपुर
- माता- करालू
- पिता- लोथुआंनाग पामेई
- मृत्यु - 17 फरवरी 1993
- योगदान- भारत की स्वतंत्रता क्रन्तिकारी
- पुरुष्कार - पद्मभूषण ( 1982 )
रानी गाइदिनल्यू पूर्वोतर भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी थी। गाइदिनल्यू बचपन से ही वीर और बहादुर थी, उन्होंने 13 वर्ष के उम्र में ही जादोनाग के नेतृत्व में ब्रिटिश विरोधी आंदोलनों से जुड़ गई थी। आगे चलकर उन्होंने नागालेंड के आदिवासियों के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ नागा आदिवासी आन्दोलन का नेतृत्व किया। महात्मा गाँधी ने उन्हें "रानी" की उपाधि दी। भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाली सबसे युवा और बहादुर महिला क्रन्त्रिकारी थी।
5. बेगम हजरत महल ( 1820- 1879 )
- पूरा नाम - मोहम्मदी खानुम
- प्रसिद्ध नाम - बेग़म हजरत महल
- जन्म - 1820 के आस-पास
- जन्म स्थान - फेजाबाद, उतरप्रदेश
- पति - वाजिद अली शाह ( अवध के अंतिम नवाब )
- पुत्र - बिरजिस कद्र
- निधन - 7 अप्रैल 1879
- योगदान - 1857 की क्रांति में योगदान
- प्रसिद्ध नारा - ["हम अपनी मातृभूमि को गुलाम नहीं बनने देंगे"]
बेगम हजरत महल का जन्म एक मुश्लिम परिवार में हुआ था और उनके माता - पिता ने उन्हें बेच दिया था। वे शुरू में एक तवायफ थी, लेकिन बाद में उन्हें लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने उन्हें अपना बेगम बना लिया और उन्हें हजरत महल की उपाधि दी। जब 1856 में अवध पैर अंग्रेजो ने अधिकार कर लिया और वाजिद अली शाह को कलकत्ता भेज दिया गया तब बेगम हजरत महल ने लखनऊ में साशन की कमान संभाली और 1857 में अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया और अंग्रेजो की छावनी पर हमला कर के उन्हें मोत के घाट उतार दिया और 1857 की क्रांति में अपना योगदान दिया।
6. कस्तूरबा गाँधी ( 1869- 1944 )
- पूरा नाम- कस्तूरबा माखंजी कपाडिया
- प्रसिद्ध नाम- कस्तूरबा गाँधी
- जन्म- 11 अप्रैल 1869
- जन्म स्थान- पोरबंदर, गुजरात
- माता- मावजी कपाडिया
- पिता- माखंजी कपाडिया
- पति- महात्मा गाँधी
- मृत्यु- 22 फ़रवरी 1944
- योगदान- स्वतंत्रता संग्राम की महान महिला और महात्मा गाँधी की पत्नी।
कस्तूरबा गाँधी स्वतंत्रता संग्राम की महान महिला थी। जिन्होंने न केवल गाँधी जी का हर परिस्थिति में साथ दिया, बल्कि उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इन्होने महिलायों में जागरूकता, शिक्षा, सफाई,और स्वास्थ के प्रति जागरूक किया। और भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में महिलायों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
7. सरोजिनी नायडू ( 1879 - 1949 )
- नाम - सरोजिनी चटोपाध्याय नायडू
- जन्म- 13 फरवरी 1879
- जन्म स्थान - हेदराबाद
- माता- वरदा सुन्दरी देवी
- पिता- अघोरनाथ चटोपाध्याय
- मृत्यु - 2 मार्च 1949
- योगदान- स्वतंत्रता सेनानी, प्रशिद्ध कवित्री
- प्रमुख पद - स्वतंत्रता के बाद उतरप्रदेश की पेहली महिला राजपाल।
सरोजिनी नायडू जिन्हें भारत की कोकिला ( Nightingale Of India ) भी कहा जाता है, एक महान कवित्री, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत की पेहली महिला राजपाल थी। इनका जन्म एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जो हेदराबाद में बस गया था। जब वे 16 वर्ष के थे तब उन्हें इंग्लैंड भेजा गया, वहा उन्होंने उछ शिक्षा प्राप्त की। फी वह भारत वापस आए और भारत के स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेने लगे।
8. भिकाजी कामा ( 1861 - 1936 )
- भारत पहली महिला जिन्होंने विदेशी धरती पर भारत का झंडा फहराई।
- पूरा नाम - भिकाजी रुस्तम कामा
- प्रशिद्ध नाम - मैडम भिकाजी कामा
- जन्म- 24 सितम्बर 1861
- जन्म स्थान- बॉमबे ( अब मुंबई )
- माता- जयजीबाई सोराबजी पटेल
- पिता- सोराबजी पटेल
- मृत्यु- 13 अगस्त 1936
- योगदान - स्वतंत्रता संग्राम में समिल्लित और महिलायों की अधिकार के लिए आवाज़ उठाई थी।
भारत की आज़ादी में कई वीर सपूतो ने अपना जीवन बलिदान किया, लेकिन विदेश में बैठकर भारत की आज़ादी के लिए आवाज़ उठाने वाली वह पेहली महिला थी। जिन्होंने विदेश में जाकर भारत का झंडा फहराया और भारत की आज़ादी की मांग की। मैडम भिकाजी कामा का जन्म बम्बई के एक पारशी परिवार में हुआ था।
9. अरुण आसिफ अली ( 1909 - 1996 )
- जन्म नाम- अरुण गांगुली
- बाद नाम - अरुण आसिफ अली ( विवाह के बाद )
- जन्म - 16 जुलाई 1909
- जन्म स्थान - कालका, पंजाब ( अब हरियाणा )
- माता- अम्बालिका देवी गांगुली
- पिता- उपेन्द्रनाथ गांगुली
- पति- आसिफ अली ( प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और वकील)
- मृत्यु- 29 जुलाई 1996
- योगदान- भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
अरुण गांगुली का जन्म एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी शादी जब आसिफ अली से हुई तब उसके बाद वे स्वतंत्रता आन्दोलनों में भाग लेने लगे। वह पहली बार नमक सत्याग्रह से जुडी और इसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा। जब 1942 में गाँधी जी समेत कई बड़े नेता जब जेल में थे, तब ये अंडरग्राउंड रह कर अंग्रेजो के खिलाफ आन्दोलन को चालू ही रखा। इन्हें " भारत की पहली महिला अंडरग्राउंड क्रन्तिकारी नेता" भी कहा जाता हैं।
10. मातंगिनी हाजरा ( 1870 - 1942 )
- पूरा नाम- मातंगिनी मांझी हाजरा
- प्रसिद्ध नाम- मातंगिनी हाजरा
- जन्म - 19 अक्टूबर 1870
- जन्म स्थान -होगला गाँव, पश्चिम बंगाल
- माता- स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं
- पिता- त्रेलोक्यनाथ मांझी
- पति- त्रिलोचन हाजरा ( वृद्ध व्यक्ति )
- मृत्यु- 19 सितम्बर 1942
- योगदान- क्रन्तिकारी आंदोलनों में इनका प्रभावशाली योगदान
उनका जन्म एक गरीब संथाल परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत साहसी और आत्मनिर्भर थी। उनकी शादी 12 वर्ष की उम्र में एक वृद्ध व्यक्ति से करा दी गई थी। इन्होने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कई बार आवाज़ उठाई और इन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। ऐ महात्मा गाँधी के विचारो से बहुत प्रभावित थी और तभी लोग इन्हें "गाँधी बुरी" के नाम से पुकारे लगे। मातंगिनी हाजरा ने आज़ादी की लड़ाई लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी।
📝निष्कर्ष:-
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओ की भूमिका इतिहास के सबसे सुन्हरे अधययो में से एक हैं। महिलाओ की योगदान केवल सहायक भूमिका तब सीमित नहीं थी। बल्कि उन्होंने नेतृत्व किया, संघर्ष किया और बलिदान दिया। चाहे वह रानी लक्ष्मीबाई की तलवार हो, सरोजनी नायडू का भाषण हो या मातंगिनी हाजरा की शहादत हो। हर कदम पर महिलाओ ने अपना सम्पूर्ण योगदान दिया है।
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