भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और उनके योगदान। Top 25 Indian Freedom Fighters You Must Know
अटूट साहस की
भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और क्रन्तिकारी: नाम, योगदान और इतिहास। Top 25 Indian Freedom Fighters And Revolutionaries: Names, Contributions And History
हमारे देश में कई ऐसे वीर व महान योद्धा हुए , जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन हमारे देश को अंग्रेजो से आज़ाद करने में लगा दिए। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी हमारे लिए केवल नाम नहीं है, बल्कि प्रेरणा के प्रतिक है। इस लेख में हम भारत के 25 प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों की सूचि, जिसमे उनका नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान, और उनका यौगदान विस्तार से बताया गया है। भारत के टॉप 25 स्वतंत्रता सेनानियों की सूचि और इतिहास।
📜 स्वतंत्रता सेनानियों की सूचि ( List Of 25 Freedom Fighters In Hindi )
1.मंगल पांडे ( 1827-1857)
- जन्म - 19 जुलाई 1827
- जन्म स्थान - गाव नगवा, बलिया जिला, उत्तरप्रदेश
- माता - अभय रानी
- पिता - दिवाकर पांडे
- निधन - 8 अप्रैल 1857
- योगदान - 1857 की क्रांति की शुरुवात की थी।
मंगल पांडे 1849 में ब्रिटिश इस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए थे, फिर जब 1857 में सेना के लिए नए कारतूसो का इस्तेमाल शुरू हुआ तब मंगल पांडे ने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया क्योकि उन कारतूसो में गाय तथा सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता था। जिसका विद्रोह करते हुए मंगल पांडे ने अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्रांति छेड़ दी।
2.रानी लक्ष्मीबाई ( 1828- 1858)
- पूरा नाम - मणिकर्णिका तांबे
- प्रसिद्ध नाम - रानी लक्ष्मीबाई
- जन्म - 19 नवम्बर 1828
- जन्म स्थान - वाराणसी, उत्तरप्रदेश
- माता - भागीरथी सापरे
- पिता - मोरोपंत ताम्बे
- पति - गंगाधर राव
- पुत्र - दामोदर राव ( गोद लिया हुआ पुत्र )
- निधन - 17 जून 1857
- योगदान - अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध और 1857 की क्रांति का नेतृत्व।
3.तात्या टोपे ( 1814- 1859)
- पूरा नाम - रामचंद्र पांडुरंग टोपे
- प्रसिध्द नाम - तात्या टोपे
- जन्म - 1814
- जन्म स्थान - येवला, नासिक जिला, महाराष्ट्र
- माता - रुख्माबाई
- पिता - पांडुरंग राव टोपे
- निधन - 18 अप्रैल 1859
- योगदान - 1857 के क्रांति के प्रमुख योद्धा
4. वीर कुँवर सिंह ( 1777- 1858)
- जन्म - 13 नवम्बर 1777
- जन्म स्थान - जगदीशपुर, भोजपुर जिला, बिहार
- माता - महारानी पंचरतन देवी
- पिता - बाबु साहिबजादा सिंह
- उम्र ( क्रांति के समय ) - 80
- निधन - 26 अप्रैल 1858
- प्रसिद्धी - 80 वर्ष के उम्र में 1857 के क्रांति के महान हीरो
- प्रसिद्ध नारा - ["अब भी कुवर सिंह जिंदा है"]
जब ऐसे महान लोगो की कहानियाँ हम तक पहुँचती है तो हमारा सर गर्व से ऊचा हो जाता है।
5. महात्मा गाँधी ( 1869- 1948)
- पूरा नाम - मोहनदास करमचंद गाँधी
- जन्म - 2 अक्टूबर 1869
- जन्म स्थान - पोरबंदर गुजरात
- माता - पुतलीबाई गाँधी
- पिता - करमचंद गाँधी
- पत्नी - कस्तूरबा गाँधी
- उपाधि - राष्ट्रपिता , बापू
- विवाह - 1883 में जब वे दोनों लगभग 13 वर्ष के थे।
- बच्चे - 4 बच्चे ( हरिलाल , मणिलाल , रामदास , देवदास )
- निधन - 30 जनवरी 1948 ( नई दिल्ली )
- योगदान - अहिंसा और सत्याग्रह के जनक
- प्रसिद्ध नारा - ["करो या मरो"], ["अंग्रेजो भारत छोड़ो"], ["स्वदेशी अपनाओ"], ["सत्य ही इश्वर है"], ["अहिंसा परमो धर्मः"]
👉 चंपारण सत्याग्रह ( 1917 )
महात्मा गाँधी ने भारत में अपना पहला आन्दोलन चंपारण के किसानो के लिए चलाया। जहा अंग्रेज चंपारण के किसानो से जबरदस्ती नील की खेती करवाते थे, और उनका सोसन भी करते थे। तब गांधीजी ने यहाँ आकार किसानो के साथ मिलकर आन्दोलन चलाया और किसानो को न्याय दिलवाया।
👉अहमदाबाद मिल मजदुर आन्दोलन ( 1918 )
1918 में भारत में ( प्लेग ) महामारी तथा भयंकर महगाई से लोग झुझ रहे थे। इस समय अहमदाबाद जो की गुजरात का एक प्रमुख औधियोगिक शहर था, वहाँ कपडे के मिलो में हजारो लोग काम करते थे। कपडा मिल के मजदूरो को बहुत कम वेतन दिया जाता था और महगाई भी बहुत बढ़ गई थी। तब वहा गांधीजी आकर मजदूरो और मिल मालिको के बिच समझोता कराया और मजदूरो को उनका हम दिलवाया।
👉खिलाफत आन्दोलन ( 1919 - 1924 )
खिलाफत आन्दोलन एक धार्मिक -राजनितिक आन्दोलन था। जो की हिन्दुस्तानी मुसलमानों के द्वारा शुरू किया गया था। जिसे आगे चलकर महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन से जोड़ दिया और हिन्दू - मुस्लमान के एकता का उदहारण पेश किया।
👉असहयोग आन्दोलन ( 1920 )
असहयोग आन्दोलन का मुख्य उदेश्य था की, ब्रिटेन के खिलाफ विद्रोह और विदेशी वस्तुवो का बहिस्कार तथा स्वदेशी वास्तुवो को बढ़ावा देना था। यह आन्दोलन महात्मा गाँधी का सबसे प्रभावशाली आंदोलनो में से एक था। फिर 5 फरवरी 1922 चोरी -चोरा हत्या कांड के कारण गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया और इससे बंद कर दिया।
👉दांडी यात्रा / नमक सत्याग्रह ( 1930 )
इस सत्याग्रह की शुरुवात इसलिए हुई थी क्योकि अंग्रेजो ने नमक पर अन्यायपूर्ण कर लगा दिया था। जिसका विरोध करने के लिए महात्मा गाँधी ने 12 मार्च 1930 को अपने 78 सहयोगियों के साथ साबरमती आश्रम ( अहमदाबाद ) से निकल कर 240 किलोमीटर की दुरी पैदल तय करके समुद्र किनारे पहुच कर नमक बनकर नमक कानून का और अंग्रेजो का विरोध किया।
👉भारत छोड़ो आन्दोलन ( 1942)
भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्वपूर्ण, निर्णायक और अंतिम जनांदोलन था। इसी आन्दोलन में महात्मा गाँधी ने ' करो या मरो ' तथा 'अंग्रेजो भारत छोड़ो ' जेसे नाराए दी।
6. रास बिहारी बोस ( 1886 - 1945 )
- जन्म - 25 मई 1886
- जन्म स्थान - बर्दवान , पश्चिम बंगाल
- माता - भुवनेश्वरी देवी
- पिता - विनोद बिहारी बॉस
- निधन - 21 जनवरी 1945 ( टोक्यो , जापान )
- योगदान - आजाद हिन्द फ़ोज ( INA ) के संस्थापक
7. सुभाष चन्द्र बोस ( 1897 - 1945 )
- जन्म - 23 जनवरी 1897
- जन्म स्थान - कटक, ओडिशा
- माता - प्रभावती देवी
- पिता - जानकीनाथ बोस
- शिक्षा - इंग्लैंड से ( ICS - INDIAN CIVIL SERVICES ) भारतीय सिविल सेवा
- प्रसिद्ध नारे - ''तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा''
- निधन - 18 अगस्त 1945 ( ताइवान में विमान दुर्घटना )
- योगदान - आज़ाद हिन्द फोज के संस्थापक और सबसे बड़े नेत।
- प्रसिद्ध नारा - ["तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा"], ["जय हिन्द "]
8. चंद्रशेखर आज़ाद ( 1906 - 1931 )
- असली नाम - चद्रशेखर तिवारी
- प्रशिद्ध नाम - चद्रशेखर आज़ाद
- जन्म - 23 जुलाई 1906
- जन्म स्थान - भाबरा गाँव , मध्यप्रदेश
- माता - जगरानी देवी
- पिता - पंडित सीताराम तिवारी
- संगठन - हिंदुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिऐशन( HSRA )
- निधन - 27 फ़रवरी 1931 ( प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में )
- नारा - मैं आज़ाद था, आज़ाद हु , और आज़ाद रहूँगा
- योगदान - भारत के युवावो को संगठित कर अंग्रेजो के खिलाफ जंग करना
- प्रसिद्ध नारा - ["दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद ही रहे है, आज़ाद ही रहेंगे।"]
9. भगत सिंह ( 1907 - 1931 )
- जन्म - 28 सितम्बर 1907
- जन्म स्थान - बंगा , लायलपुर जिला , पंजाब ( अब पाकिस्तान में है )
- माता - विधावती कौर
- पिता - किशन सिंह
- निधन - 23 मार्च 1931
- उम्र - 24 वर्ष
- योगदान - भारतीय युवावो को एकत्रित कर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध
- प्रसिद्ध नारा - ["इंकलाब जिंदाबाद"]
भगत सिंह का जन्म एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता, चाचा, दादा सभी लोग अंग्रेजो के खिलाफ लड़ते हुए आये थे। भगत सिंह पर अपने परिवार, असहयोग आन्दोलन, जलियांवाला बाग़ हत्या कांड तथा लाला लाजपतराय की मृत्यु का गहरा असर पड़ा था। भगत सिंह ने लाहोर के नेशनल कोलेज से शिक्षा प्राप्त की और वह वही से क्रतिकरियो के संपर्क में गए थे। आगे चलकर उन्होंने (HSRA) हिंदुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिऐशन में सक्रीय भूमिका निभाई। फिर अंग्रेजो ने भगत सिंह, राजगुरु, और सुखदेव को गिरफ्तार कर के 23 मार्च 1931 को लाहौर सेन्ट्रल जेल में तीनो को फाँसी दे दी। उनकी शहादत के बाद पुरे देश में शोक और आक्रोश फेल गया। भगत सिंह आज भी देश के युवायो के लिए प्रेरणा का श्रोत है। उनका नाम आज भी बड़े गर्व से लिया जाता है।
10. राजगुरु ( 1908 - 1931 )
- पूरा नाम - शिवराम हरी राजगुरु
- जन्म - 24 अगस्त 1908
- जन्म स्थान - खेड़ गाँव, पुणे जिला, महाराष्ट्र
- माता - पार्वती देवी
- पिता - हरी नारायण राजगुरु
- निधन - 23 मार्च 1931
- उम्र - 22 वर्ष
- योगदान - भगत सिंह और सुखदेव के साथ स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भागिदार।
राजगुरु एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे, वे बचपन से देशभक्त व क्रन्तिकारी विचारधारा के थे। उनकी शिक्षा वाराणसी के एक संस्कृत विद्यालय में हुई थे, जहा उन्होंने शास्त्रों के साथ साथ देश की परिस्थितियों को भी समझा। राजगुरु ( HSRA ) के सदश्य बने जहा उन्होंने सुखदेव और भगत सिंह के साथ मिलकर कई सारे क्रतिकारिक गतिविधियों में शामिल रहे थे। राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह के शहादत के बाद हर साल 23 मार्च को शहीद दिवश के रूप में मनाया जाने लगा। और राजगुरु के गाँव ''खेड़'' का नाम बदलकर ''राजगुरु नगर'' कर दिया गया।
11. सुखदेव ( 1907- 1931 )
- पूरा नाम - सुखदेव थापर
- जन्म - 15 मई 1907
- जन्म स्थान - लुधियाना , पंजाब
- माता - रल्ली देवी
- पिता - रामलाल थापर
- निधन - 23 मार्च 1931
- उम्र - 23 वर्ष
- योगदान - भगत सिंह और राजगुरु के साथ स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भागिदार।
सुखदेव थापर का जन्म एक आर्य समाजी परिवार में हुवा था। उनमे बचपन से ही देशभक्ति की भावना जागृत थी। उन्होंने लाहौर के नेशनल कोलेज से शिक्षा प्राप्त की, जहा उनकी भगत सिंह और अन्य क्रातिकारी वीरो के साथ मुलाकात हुई। ऐ भी ( HSRA ) के प्रमुख सदस्य थे। 1928 में जब लाला लाजपतराय की अंग्रेजो द्वारा हत्या कर दी गई तब HSRA के सदस्यों ने ये निर्णय लिया की, लाला लाजपतराय के हत्यारे जनरल सोर्ड्स की हत्या की जाएगी। तब भगत सिंह , राजगुरु , सुखदेव और अन्य साथियों ने मिलकर सोर्ड्स की हत्या कर दी। जिसके जुर्म में अंग्रेजो ने भगत सिंह , राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी।
12. खुदीराम बोस ( 1889 - 1908 )
- जन्म - 3 दिसम्बर 1889
- जन्म स्थान - गाँव हबीबपुर, मोदिनिपुर जिला, पश्चिम बंगाल
- माता - लक्ष्मीप्रिया देवी
- पिता - त्रिलोक्यानाथ बोस
- निधन - 11 अगस्त 1908
- उम्र - 18 वर्ष
- योगदान - भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रन्तिकारी
खुदीराम बोस का जन्म एक साधारण बंगाली परिवार में हुवा था। खुदीराम बोस जब बहुत छोटे थे तभी उनके माता - पिता की मृत्यु हो गई थी। तब उनकी बड़ी बहन ने उनका पालन -पोषण किया था। जब वे 16 वर्ष के थे तभी वे स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े थे। खुदीराम बोस ने 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में बम में शामिल थे जिसके बाद उन्हें अंग्रेजो ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दे दी गई।
13. सरदार वल्लभभाई पटेल ( 1875 - 1950 )
- पूरा नाम - वल्लभभाई झावेरभाई पटेल
- जन्म - 31 अक्टूबर 1875
- जन्म स्थान - नडियाद गुजरात
- माता - लाडबाई पटेल
- पिता - झावेरभाई पटेल
- पेशा - वकील , राजनेता , स्वतंत्रता सेनानी
- उपाधि - सरदार , लौह पुरुष ( IRON MAN OF INDIA )
- निधन - 15 दिसम्बर 1950
- प्रसिद्ध कार्य - भारतीय रियासतों का एकीकरण
- प्रसिद्ध नारा - ["हमारा देश हमारी मातृभूमि है, इसका एकीकरण हमारा धर्म है।"]
सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। उन्होंने 36 की उम्र में इंग्लैंड जाकर कानून की पढाई की और बेरिस्टर बने। सरदार पटेल महात्मा गाँधी से बहुत प्रभवित थे , उन्होंने महात्मा गाँधी के कई आंदोलनों में भाग लिए और उसका नेतृत्व किया। सरदार पटेल को सरदार की उपाधि बारडोली की महिलायों ने दे थी।
सरदार पटेल भारत की एकता का एक अभिन्न अंग थे। जब भारत अंग्रेजो से आज़ाद हुवा तब भारत में 562 रियाश्ते थी , जिन्हें एक करके भारत को एक संगठित राज्य बनाया। जहाँ उन्हें हेदराबाद , जुनागड़ , कश्मीर जेसी रियाश्तो को मिलाने के कई सारे समस्यायों का सामना करना पड़ा। भारत की आज़ादी के बाद वे पहले उपप्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राज्यों के मंत्री बने।
14. अश्फाक उल्ला खां ( 1900 - 1927 )
- जन्म - 22 अक्टूबर 1900
- जन्म स्थान - शाहजहापुर , उत्तरप्रदेश
- माता - मजहुरुन्निसा बेगम
- पिता - शफीक उल्ला खां
- निधन - 19 दिसम्बर 1927
- योगदान - कोकरी कांड के प्रमुख नायक
अशफाक़ उल्ला खां का जन्म एक मुशलिम पठान परिवार में हुवा था। वे बचपन से हे होशियार थे और उन्हें कई तरह की भाषाए पढ़नी व लिखनी भी आती थी जेसे अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू इत्यादि। वे बचपन से ही देशभक्त थे। अशफाक़ उल्ला खां कोकरी कांड के प्रमुख नायको में से एक थे। उन्होंने अपने दोस्त पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी और हिन्दू-मुशलिम की एकता का अद्भुद उदहारण पेश किया।
15. बाल गंगाधर तिलक ( 1856 - 1920 )
- पूरा नाम - केशव गंगाधर तिलक
- प्रसिद्ध नाम - बाल गंगाधर तिलक
- जन्म - 23 जुलाई 1856
- जन्म स्थान - रत्नगिरि, महाराष्ट्र
- माता - पार्वती बाई गंगाधर
- पिता - गंगाधर रामचंद्र तिलक
- निधन - 1 अगस्त 1920
- योगदान - स्वतंत्रता सेनानी ,समाज सुधारक
- प्रसिद्ध नारा - ["स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और में इसे लेकर रहूँगा"]
16. लाला लाजपत राय ( 1865- 1928 )
- पूरा नाम - लाला लाजपत राय
- उपनाम - पंजाब केसरी
- जन्म - 28 जनवरी 1865
- जन्म स्थान - धुडिके गाँव, मोगा जिला, पंजाब
- माता - गुलाब देवी
- पिता - राधा कृष्ण अग्रवाल
- निधन - 17 नवम्बर 1928
- योगदान - साइमन कमीशन का विरोध , स्वतंत्रता क्रन्तिकारी
लाला लाजपत राय का जन्म एक अग्रवाल परिवार में हुवा था। उन्होंने लाहौर के गवर्नमेंट कोलेज से पढ़ाई की और वकालत की डिग्री प्राप्त की। वही से वे आर्य समाज तथा स्वामी दयानन्द सरस्वती से प्रभावित हुए और कई आंदोलनों में भाग लिए जिसमे से उन्होंने साईमन कमिशन का विरोध करते -करते अपने प्राणों की आहुति दे दी।
17. पंडित जवाहरलाल नेहरु ( 1889 - 1964 )
- पूरा नाम - पंडित जवाहरलाल नेहरु
- प्रसिद्ध नाम - चाचा नेहरु
- जन्म - 14 नवम्बर 1889
- जन्म स्थान - इलाहाबाद , उतरप्रदेश
- माता - स्वरुप रानी नेहरु
- पिता - मोतीलाला नेहरु
- पत्नी - कमला नेहरु
- पुत्री - इंदिरा गाँधी ( भारत की पेहली महिला प्रधानमंत्री )
- प्रमुख पद - भारत के पेहले प्रधानमंत्री ( 1947 - 1964 )
- निधन - 27 मई 1964
- योगदान - भारत की स्वतंत्रता में प्रमुख योगदान
- प्रसिद्ध नारा - ["आराम हराम है"]
नेहरु जी का जन्म एक शिक्षित परिवार में हुवा था। इनके पिता मोतीलाल नेहरु प्रसिद्ध वकील और कोंग्रेस के बड़े नेता भी थे। उनकी पढ़ाई में रूचि बचपन से ही थी उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इंग्लैंड से प्राप्त की। आगे चलकर ये कोग्रेस की पार्टी से जुड़े और भारत की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
18. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ( 1884 - 1963 )
- नाम - राजेन्द्र प्रसाद
- उपनाम - देशरत्न
- जन्म - 3 दिसम्बर 1884
- जन्म स्थान - जीरादेई , सारण जिला ( सिवान ) ,बिहार
- माता - कमलेश्वरी देवी
- पिता - महादेव सहाय
- प्रमुख पद - भारत के पहले राष्टपति ( 1950 से 1962 )
- निधन - 28 फ़रवरी 1963
- योगदान - महात्मा गाँधी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित
- प्रसिद्ध नारा - ["राष्ट की सेवा में, ही जीवन की सच्ची सफलता है"]
डॉ.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म एक धार्मिक, पारम्परिक और शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने मेट्रिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया और स्कॉलरशिप लेकर कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे वकालत और राष्टीय आंदोलनों से जुड़ गए। फिर जब भारत आज़ाद उसके बाद वे सविधान सभा के अध्यक्ष बने और संविधान निर्माण में अपना योगदान दिया और भारत के प्रथम राष्टपति बने। लगातार तीन बार राष्टपति चुने गए।
19. लाल बहादुर शास्त्री ( 1904 - 1966 )
- पूरा नाम - लाल बहादुर शास्त्री
- जन्म - 2 अक्टूबर 1904
- जन्म स्थान - मुगलसराय, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
- माता - रामदुलारी देवी
- पिता - शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
- प्रमुख पद - भारत के दुसरे प्रधानमंत्री ( 1964 - 1966 )
- प्रसिद्ध नारा - जय जवान जय किसान
- निधन - 11 जनवरी 1966
- योगदान - स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भागीदार
- प्रसिद्ध नारा - ["जय जवान, जय किसान"]
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुवा था। जब वे 18 महीने के था तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनका जीवन संघर्ष से भरा रहा। उन्होंने बड़े ही ईमानदारी से शिक्षा पूरी की और स्वतंत्रता संग्राम में सामिल हुए। फिर जब देश आज़ाद हुवा और वे भारत के दुसरे प्रधानमंत्री बने तब उनके नेतृत्व में भारत ने 1965 में पाकिस्तान से युद्ध जीता, खाद्य संकट से देश को बाहर निकाला, हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नीव राखी।
20. बिरसा मुंडा ( 1875 - 1900 )
- नाम - बिरसा मुंडा
- प्रसिद्ध नाम - धरती आबा
- जन्म - 15 नवम्बर 1875
- जन्म स्थान - उलीहातू, रांची, झारखण्ड
- माता - करमी हातू
- पिता - सुगना मुंडा
- निधन - 9 जून 1900
- आन्दोलन - मुंडा विद्रोह
- प्रमुख उदेश्य - अंग्रजो का विरोध और आदिवासी आधिकारो की रक्षा।
- प्रसिद्ध नारा - ["अबुआ राज सेर उलगुलान"]→मतलब ⇒ [ हमारा राज आएगा- बगावत के जरिए ]
बिरसा मुंडा का जन्म एक गरीब परिवार व मुंडा जनजाति में हुआ। उन्होंने कुछ समय तब जर्मन मिशन स्कूल में पढ़ाई की। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन और जमींदारी प्रथा के खिलाफ विद्रोह शुरु लिया और लोगो को एकजुट किया। उन्होंने कहा की जल, जंगल और जमीन पर पहला आधिकार आदिवासियों का है। बिरसा मुंडा ने अंधविश्वास, नशाखोरी, ईसाईकरण और जातीय भेद - भाव के खिलाफ आवाज़ उठाई। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें बगावत फेलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और 9 जून 1900 को उनकी जेल में मृतु हो गई। आदिवाशी समाज उन्हें "धरती आबा" कहकर पूजते है, जिसका अर्थ है "धरती का पिता"।
21. सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू ( 1815- 1855 ) ( 1816 - 1855 )
सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू दोनों अपने सगे भाई थे। जिन्होंने 1855 में अंग्रेजो के खिलाफ़ विद्रोह किया और संथाल विद्रोह की शुरुवात की।
- नाम - सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू
- जन्म - सिद्धू (1815) और कान्हू ( 1816 )
- जन्म स्थान - गाँव भोगनाडीह, साहेबगंज जिला, झारखण्ड
- माता - झोकू मुर्मू
- पिता - चुडू मुर्मू
- भाई - कुल चार भाई ( सिद्धू , कान्हू , चाँद , भेरव )
- बहन - दो बहन ( फूलो , झानो )
- निधन - 26 जुलाई 1855
- प्रमुख आन्दोलन - संथाल विद्रोह
- प्रसिद्ध नारा - ["राजा अपना, कानून अपना, राज हमारा रहेगा"]
सिद्धू कान्हू दोनों सगे भाई थे, जिनका जन्म एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था। सिद्धू और कान्हू मुर्मू झारखण्ड के महान स्वतंत्रता सेनानी थे। इन आदिवासियों पर वहा के जमींदारो और साहुकारो के द्वारा शोसन किया जाता था और अत्यदिक कर वशुल करते थे। और ब्रिटिश सरकार द्वारा अन्यायपूर्ण कानून उनपर जबदस्ती थोपे जाते थे। जिसके कारण दोनों भाइयो ने मिलकर जमींदारो और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संथाल विद्रोह की सुरुवात कर दी। इस विद्रोह को दबाने के लिए सिद्धू और कान्हू मुर्मू को धोखे से गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी दे दी गई।
22. वीर सावरकर ( 1883 - 1966 )
- पूरा नाम - विनायक दामोदर सावरकर
- प्रसिद्ध नाम - वीर सावरकर
- जन्म - 28 मई 1883
- जन्म स्थान - गाँव भागुर, नासिक जिला, महाराष्ट्र
- माता - राधाबाई सावरकर
- पिता - दामोदर पंत सावरकर
- निधन - 26 फ़रवरी 1966
- योगदान - स्वतंत्रता संग्राम, लेखक, समाज सुधारक
- प्रसिद्ध नारा - ["एक देव, एक वंदन, एक निशान- हिन्दुस्तान"]
वीर सावरकर का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुवा था।बचपन से ही वे बहुत साहसी और देशभक्त थे, उनके बड़े भाई गणेश सावरकर भी एक क्रन्तिकारी थे। सावरकर ने पुणे के फग्युर्सन कोलेज से शिक्षा प्राप्त की फिर वे आगे की पढ़ाई के लिए लन्दन गए जहा उन्होंने ज्रेग इन लो कोलेज में दाखिला लिया। सावरकर जी लन्दन में रहते हुए ही फ्री इंडिया सोसाइटी की स्थापना की और भारत की स्वतंत्रता के विचार को दुनिया के सामने रखा। फिर बाद में इन्हें कलेक्टर जैक्सन की हत्या के आरोप में 1909 में गिरफ्तार कर लिया और उन्हें दो आजीवान कारवास ( 50 वर्ष की सजा दी और उन्हें अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल ( काला पानी ) में भेज दिया गया।फिर उन्हें कुछ वर्ष बाद रिहाई मिली और वे हिन्दू महासभा से जुड़े और हिंदुत्व की विचारधारा को एकत्रित किया।
23. रामप्रसाद बिस्मिल ( 1897 - 1927 )
- पूरा नाम - पंडित रामप्रसाद बिस्मिल
- उपनाम - बिस्मिल
- जन्म - 11 जून 1897
- जन्म स्थान - शाहजहापुर, उतरप्रदेश
- माता - मुलमती देवी
- पिता - मुरलीधर
- प्रमुख संगठन - हिदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ( HRA )
- निधन - 19 दिसम्बर 1927
- योगदान - स्वंत्रता सेनानी , काकोरी कांड
- प्रसिद्ध नारा -["सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है..."]
रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुवा था। वे बचपन से राष्टभक्ति और साहित्य के प्रेमी थे। वे आर्य समाज और स्वामी विवेकानन्द के विचारो से प्रभावित हुए। 1916 में लाला लाजपत राय के भाषण से प्रेरित होकर क्रन्तिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे। इन्होने "क्रांति गीत" , "स्वदेशी रंग" जेसे कई लेख और कविताएँ लिखी। 1924 में इन्होने चंद्रशेखर आज़ाद, राजेन्द्र लाहिड़ी, अश्फाक उल्ला खां, और सुखदेव नारायण कक्की के साथ मिलकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ( HRA ) की स्थापना की। इसके तहत उन्होंने अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी और अंग्रेजो ने इन्हें 1926 को गिरफ्तार कर लिया और 19 दिसम्बर 1927 को फांसी दे दी गई। उनकी सबसे प्रशिद्ध क्रन्तिकारी कविता जो लोगो में जोश भर देती थी वह है:- "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजुए- कातिल में है"।
24. नाना साहेब ( 1824 - 1859 )
- पूरा नाम - धुंधूपंत बालाजी बाजीराव
- प्रसिद्ध नाम - नाना साहेब पेशवा
- जन्म - 19 मई 1824
- जन्म स्थान - बनारस, उतरप्रदेश
- माता - गंगाबाई
- पिता - पेशवा बाजीराव द्वितीय ( दत्तक पिता )
- निधन - 1859 के बाद गायब ( मृत्यु का ठोश प्रमाण नहीं )
- योगदान - 1857 की क्रांति में प्रमुख नेता
- प्रसिद्ध नारा -["ब्रिटिशो भारत छोड़ो। हम स्वराज लेकर रहेंगे"]
नाना साहेब का जन्म मराठा साम्राज्य में हुवा था वे मराठा साम्राज्य के अंतिम पेशवा थे। अंग्रेजो ने नाना साहेब की पिता की मृत्यु के बाद उनकी पेंशन बंद कर दी थी जिससे नाना साहेब बहुत नाराज हुए। नाना साहेब अंग्रेजो के विरोध में भारतीय सिपाहियों के विद्रोह के प्रमुख नेता बनकर उभरे। उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सरकार को वहा से खदेड़ भगाया इसमे उनके सेनापति थे - तात्या टोपे , अजीमुल्ला खा , सरदार झलकारी बाई। लेकिन अंग्रेजो ने लखनऊ पर फिर से हमला किया और दोनों पक्षों को भारी क्षति पहुची जिससे के नाना साहेब और उनके साथियों को लखनऊ छोड़कर जाना पड़ा और उसके बाद से वे गायब हो गए किसी को कुछ पता नहीं चला की वे कहा गए।
25. बेगम हजरत महल ( 1820 - 1879 )
- पूरा नाम - मोहम्मदी खानुम
- प्रसिद्ध नाम - बेग़म हजरत महल
- जन्म - 1820 के आस-पास
- जन्म स्थान - फेजाबाद, उतरप्रदेश
- पति - वाजिद अली शाह ( अवध के अंतिम नवाब )
- पुत्र - बिरजिस कद्र
- निधन - 7 अप्रैल 1879
- योगदान - 1857 की क्रांति में योगदान
- प्रसिद्ध नारा - ["हम अपनी मातृभूमि को गुलाम नहीं बनने देंगे"]
📝निष्कर्ष:-
भारत की आज़ादी सिर्फ एक आन्दोलन नहीं, बल्कि हज़ारो स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की एक महागाथा है। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का श्रोत है। उनके आदर्श और संघर्ष हमें ये सिखाते है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में हमें कभी भी हमें अपना लक्ष्य नहीं भूलना चाहिए और कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। भगत सिंह के साहस और बलिदान, सुभाष चंद्र बोस का नेतृत्व और रानी लक्ष्मीबाई की वीरता हमारें लिए प्रेरणा का श्रोत है।
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